Thursday, 19 January 2012

ये दुनिया ये ज़िन्दगी कितना सही देती है और कितना गलत

कहते है के "अच्छाईओं के बदले, इस दुनिया में हमेशा गलत ही मिलता है " शायद सही भी है और गलत भी !

"जो होता है अच्छे के लिए होता है " ये भी कुछ हद्द तक सही है और गलत भी ! ये जो है वो ऊपर लिखे शब्द्दो को कुछ हद्द तक समर्थन भी देता है !

दुनिया में हर इन्सान सोचता है के वो जो कर रहा है वो सही है लेकिन ये कभी नहीं सोचता के वो जो कर रहा है वो कितना सही और कितना गलत है ! और अगर किये हुए काम का अंजाम अच्छा निकले तो दूसरी लिखी हुई बात सही हो जाती है और अगर अंजाम गलत हो तो पहली बात सही साबित होती है !

लेकिन इन्सान वास्तव में यह नहीं सोच पाता के उसने जो काम किया , क्या वो वास्तव में सही था ? 

कर्म हमारे रहेते हुए भी हम ये नहीं सोच पाते के वो कितने सही होंगे और कितने गलत ! कभी कभी हम गलत होते हुए भी अपना समर्थन खुद्द करते रहेते है और अपने पक्ष को सही साबित करने के लिए किसी भी हद्द या कहे के तर्क तक जा सकते है ! 

उदहारण के तौर पर :

"आपने कोई गलती की या कहे के आप कही गलत थे , उस गलती ने हो सकता है कईओं का दिल दुखाया हो  ! आपको उस गलती का एहसास हुआ और आप अपने गलत होने और उस गलती पे शर्मसार भी हुए ! और उस से आपको एक सही दिशा और सही रास्ते की सोच भी मिली , आपने उस गलती को ना दोहराने का फैसला भी किया, या कहे के उस काम को खुद्द अंतर मन से गलत साबित करते हुए , दोबारा ना करने का फैसला किया ! तब ये कहा जा सकता है के दूसरी पंक्ति शायद सही है  के जो हुआ अछे के लिए हुआ , जिसकी वज़ह से आप में ये समझ आई के आप का किया हुआ काम गलत था और उसको अपनी ज़िन्दगी से दूर करके आप ने अपने अंदर उसका एहसास रखा !" 

"मेरी ज़िन्दगी में ऐसे कई किस्से और उदहारण रोज़ आते रहेते है, मुझे कई लोग भी मिलते है जो गलत होके उसका कोई पछतावा महसूस नहीं करते और ना ही किये हुए अपने कर्मो को गलत नज़रों से देखना पसंद करते है और ना ही उन्हें यह पसंद होता के कोई उनके बारे में उनसे कुछ कहे ! और जब वक़्त खुद्द उनके अंदर से चीख के पूछता है के आज कहा हो तो जवाब में बोल दिया जाता है के 

हमने हमेशा थामे रखा अच्छाईओं का दामन 
क्या पाता था के सबब और अंजाम ये होगा,
और दर्द से भर जायेगा ज़िन्दगी का आँगन !

यहाँ आके वो पहली पंक्ति सही हो जाती है के "अच्छाईओं के बदले , गलत ही मिला "!"

अब बात यहाँ देखने वाली ये है के दोनों पंक्तिया कहा तक सही है और गलत ! एक तरफ आपने अपने किये हुए गलत काम का एहसास कर के , सबके सामने उसके लिए शर्मसार होके उस को अपने से दूर किया और दोबारा ना करने से तौबा की , तो यह कई मायनों में सही हो जाता है के चलो जो हुआ अच्छे के लिए हुआ !

दूसरी तरफ आपने जो किया उसका आपको कोई पछतावा नहीं और ना ही  आप उसके लिए शर्मसार है और अपने किये हुए काम को सही साबित करने के लिए कुछ भी कर सकते है लेकिन सबके सामने उसको गलत सुन्न , देख और कहे नहीं सकते, वैसा दोबारा न करने की शर्त अपने आप से नहीं लगा सकते  ! लेकिन जब खुद्द आपका मन उसके लिए विचलित होता है और आपको फिर भी कोई फर्क नहीं पड़ता तब शायद ये बात बोलने को आ जाती है के "हमारी अच्छाईओं के बदले हमे गलत ही नसीब हुआ " यहाँ ये पंक्ति गलत हो जाती है !

ये पंक्ति सही होती है वहा जैसा के एक उदहारण मेरे पास आया के , "मेरे एक दोस्त ने अपने एक दोस्त की हर तरह से मदद की चाहे स्कूल हो या कॉलेज, घर हो या बाहर , यहाँ तक के उसकी प्रोफेशनल लाइफ में भी , लेकिन जब वो उस से दूर हुआ तो यह उसने भी नहीं सोचा होगा के दोस्ती के लिए उसने जो भी किया उसका परिणाम उसे कुछ दुनिया के बेढंगे तरीकों के साथ दिया जायेगा , जिसकी वज़ह से उसे अपनी नौकरी से भी हाथ धोना पड़ेगा ! "  जब उसने बात सबसे शेयर की तब शायद हर दोस्त हर आदमी जो वहा मौजूद था उन् सबका एक ही तर्क था "के भाई अच्छाई करने निकले थे आज जोह मिला वोह तुम्हारे लिए एक सबक है

क्या सही है क्या गलत ये कोई इन्सान उसका निर्णय नहीं ले सकता , लेकिन अपने किये हुए कर्मो को खुद्द पहचान के , खुद्द उनका अंतर तर्क करके , वो अमल करने लायक है के नहीं , ये सब जान के इन पंकित्यों पे गोर करे तब कही जाके उसको समझ आएगा के ये दुनिया ये ज़िन्दगी कितना सही देती है और कितना गलत!

 



















Thursday, 15 December 2011

सच और झूठ और हम इन्सान

मेरे एक दोस्त ने कुछ दीनो पहले अपने Gmail पे एक लाइन कुछ इस तरह की लिखी :

"Telling a lie and hiding a truth are two different things...."

बात सही है , झूठ बोलना और किसी सच्चाई को छुपाना दोनों बिलकुल अलग अलग सी बात है ! और यह भी एक सच बात है के सच और झूठ दोनों ही कितना भी छुपा लो एक न एक दिन सामने आ ही जाते है !
कुछ लोग झूठ बोल के सोचते है के चलो मुसीबत टली, या सोच लेते है के जब झूठ बोलने से काम हो सकता है तो बोलने में क्या हर्ज़ है !  लेकिन यहाँ भी सोचने वाली बात है के एक झूठ वोह होता है जिस को बोल के आप नेक काम को अंजाम देते है , और दूसरा जब उस झूठ से किसी को दर्द पहुचे या नुक्सान हो !

हम लोग कही न कही , कभी न कभी झूठ हमेशा बोलते है , इन्सान है ना - गलतियों के पुतले है तो ऐसा कोई नहीं जिसने गलती ना की हो और फिर उस गलती के लिए झूठ न बोला हो !

लेकिन जैसा के मेरे दोस्त ने ऊपर लिखा और बोला के झूठ बोलना और सच छुपाना दोनों अलग बात है ! आपने गलती की लेकिन आप उस ग़लती का एहसास करते हुए भी कुछ बोल नहीं सकते, या फिर बोले के आपकी मजबूरी है के आप सच नहीं बोल सकते पर लोग आपको गलत ही कहेंगे , और आप उनकी नज़र में झूठे किस्म के इन्सान होंगे !

और आप पुरे मकसद से सोच समझ के झूठ बोल रहे है ताकि कुछ गलत होने से बचे, वो भी झूठ बोलने में नहीं आता जैसा के श्री कृष्ण ने कहा गीता में :

"किसी की भलाई के लिए सोच समझ के कहा गया झूठ , कोई पाप नहीं  है "

लेकिन, अपनी महत्वकांक्षा को पूरा करने के लिए किसी को नुकसान पहुचाना, आपके बोलने से किसी को जिसने कुछ नहीं किया हो वो सजा का हक़दार बने, यह झूठ पाप है और गलत भी !

मेरी ऊपर की बातों को पढ़ के कुछ लोग अपने ऊपर जरुर लेंगे और जहा जहा उन लोगो को लगेगा, वही कोई न कोई कही हुई बात अपने ऊपर लेकर यह सिद्ध करने की कोशिश करते रहेंगे के :

"उन्होंने भी कोई सचाई किसी से छुपाई नहीं , लेकिन कुछ उनकी मज़बूरी थी जिसके वज़ह से पूरी बात या बोले के सच बोल भी नहीं पाए "

जोह ऐसा सोचते होंगे में उनको एक बात बता दू, सच बोलने के लिए बहुत हिम्मत चाहिए होती है, क्योंकि सच बोलने का परिणाम सोच के ही इन्सान झूठ बोलने का रास्ता अपनाता है ! इन्सान को लगता है के कही सच बोल दिया तोह उसका बना बनाया काम ना बिगड़ जाए, या कोई उस से दूर न हो जाये , या वो अकेला न हो जाए !
पर यह भी एक सच है के सच का सामना करना और फिर से उस गलती की तरफ ना देखना , जिसके लिए आपको सचे होने का प्रमाण देना पड़ा , वो उस से भी मुश्किल काम है !

लोग गलतियाँ करते है फिर जब लगता है तो झूठ बोलके संभल जाते है या फिर सच तोह बोलते है लेकिन उसका पछतावा न तो उनके जह्हन में आता और नाही आगे के लिए सोचते ! जिंदगी है आगे चलनी है अभी का समय निकलना जरुरी है इसलिए बस उस वक़्त तक के लिए बात जैसे तैसे संभल जाए यही सोचते है !

सच बोलके उस रस्ते पे चलना बहुत मुश्किल काम है इन्सान के लिए !

झूठ बोलना बहुत आसन !

और अपनी भलाई के लिए सच छुपाना चलता है पर दुसरे का नुकसान ना हो, उसके लिए सच पचाना शायद इन्सान के लिए मुश्किल होता है !

कही न कही मेरे दोस्त की कही हुई बात सही लगती है और कही न कही उसका कोई अर्थ निकल के सामने नहीं आता !

लोग दुहाई देते रहेते है के सच बोलने की सजा मिली उन्हें जीवन भर , लेकिन कोई उन्हें यह समझाए के सच बोलने से काम नहीं चलता जीवन भर उस सच के पीछे जो भी वज़ह है उसको महसूस करके उस रास्ते पे नहीं चलना शायद ज्यादा जरुरी है ! जोह वोह कभी कर नहीं पाए , गलतियाँ दोहराई , तब कही झूठ बोला खुद्द से , दूसरों से , या फिर आधा -अधुरा सच बोलके अपने जीवन को संभाला !
जब सच ही आधा अधुरा बोला तो दिल में दीमाग में  उसकी कदर क्या रहेगी , जब दिल से उस सच का एहसास हुआ नहीं तो वो तुम्हे कौनसी ख़ुशी देगा , और तुम ऐसा सच बोलके एस जीवन से , किसी इन्सान से या बोलो के अपने ज़मीर से कैसे उम्मीद कर सकते हो के आपको ख़ुशी मिले !

झूठ बोलना और सच को छुपाना दोनों अलग बात है यह उन् लोगो पर प्रमाणित होती है जिनको एहसास है के उनका झूठ किसी का नुक्सान नहीं होने देगा या उनका सच छुपाना किसी गलत चीज़ को बढ़ावा नहीं देगा और उस सच को छुपाने से किसी का भला ही हो रहा है ! जो यह नहीं सोचते के जिस दिन सच सामने आएगा उस दिन क्या होगा और उन्हें शर्मिंदा होना पड़ेगा , लेकिन वोह यह बात जानते है के एक दिन उन्हें फक्र से अपनी बात समझाने का मौका भी मिलेगा और लोग उनकी इस गलती पर भी फक्र करेंगे ! उन् से बेशक लोग दो पल के लिए दूर हो जाए लेकिन एक दिन उनकी सचाई सामने आने के बाद सब उनके साथ होंगे !








Monday, 12 December 2011

ज्योतिष शास्त्र और हमारी सोच और समाज ....


हमारा  ये  समाज   बहुत सी  कुरीतियों  से  और  बहुत  कम  अच्छाइयों  से  घिरा  है  , ये  सबको  मालूम  है  पर कोई  ना  तो  इससे  इस  दलदल  से  निकलना  चाहता  है  और  न  ही  कोई  ये  चाहता  है के  ये  कुछ  गंदगी  समाज  से  हटे !

क्योंकि  कईओं  की  ज़िन्दगी  अच्छाईओं  से  कम  पर  बुराईओं से जयादा  चलती है  ! आज  मेरे  इस  ब्लॉग  पे  मैं  इक  ऐसे   ही  शास्त्र  की  बात  उठाई  है  , जो  अपने आप  में  बहुत  पवित्र  है  और  इसके  ज्ञान  करता  जानते  है  के  यह  कितना  कहा उपयोगी  हो  सकता  है  ! लेकिन  आज  हर  गली  मोहल्ले में  आपको  इसका  सर्वोच्छ  ज्ञानी देखने  को  मिलेंगे !

जो  अपने  जीवन  व्यापन  के  लिए  इस  शास्त्रा  का  गलत  उपयोग भी  कर  रहा  है  और  ना  जाने  क्यों  समाज का  शिक्षित  वर्ग  पढ़ा  लिखा  होके  भी अन्पड़ो की तरह  इससे  अपनाये  जा  रहा  है  !
मैंने  कुछ  दीनो  पहले  न्यूज़ पपेर्स  में  चनेल्स  पे  देखा  के अमिताभ  जी  , जो  के  अपने  घर  के  आने  वाले  चिराग  के  बारे  में  सोच  सोच  के  अंदर से  उत्साहित  है , उनका  घर  परिवार  इस  खुश  खबरी  से  महक  रहा  है , जो  माँ बन  ने  वाली  है  वो  इस  का  आनंद  और  सबसे  बड़ा  सम्मान  पाने  को  तेयार  है  , वो  माँ  जो  अपने बेटे  का  बचपंन  अब  अपने  घर  के  नए  फूल  में  फिर  से  देखने वाली है  , वो  इन्सान  जो  आज  एक  जिम्मेदार  बेटे  , पति  और  अब  बाप  बन  ने  का गौरव  महसूस  करने  जा  रहा  है , वह  कुछ  एक  तरफ  धन  –संपदा -ख्याति  पाने के  लिए  कुछ  लोग  , जो  इस  धरा  पे  अभी आया  भी  नहीं  उसके  बारे  में  कई  तरह की भविष्यवानिया कर  रहे  है  !
आपको  ज्ञान  है  आप  इस  शास्त्रा  में  शिक्षित  है  पर  आपको यह  हक  नहीं  बनता  के  आप  इसका  उपयोग  इस  तरह  से करे , खुले  बाज़ार  !
वो  जान  जो  अभी  धरा  पे  भी  नहीं  आई  , वो  अगर  ये  सुन्न लेती  तो  भगवान्  से  यही  पूछती  के  में  क्या  हु , कौन  हु , क्यों  मुझे  यहाँ  भेजा जा रहा  है  , जहा  मेरे  आने  से  पहले  ही मेरी  तकदीर  पढ़ी  जा  रही  है  , मेरा वजूद  घड़ा  जा  रहा  है !
ऐसे लोगो  को  कोई  नहीं  रोकेगा  , लेकिन  बड़े  धयान  से  इन्हे   सुना  जाता  है ! बड़ी  लगन  से  आज  कल  TV पे  इनके  प्रोग्राम आते  है  उसमे  सब  काम  छोड़  के  लोग  घुस  के  बैठ  जाते  है , और  अपने  कर्मो  की रेखाओं  को  इनकी  बातों  से  टटोलते  रहेते  है  !
दूसरी  तरफ  जहा  अमिताभ  जी , इन  लोगो  से  ट्विट्टर  पर  नाराज़ हो  रहे  थे , वही  कुछ  दीनो  के  बाद  सब  कुछ  पूरण  हो  गया  ! और  एक  नयी खबर  फिर  छपी ,
आमिर  और  उनके  होने वाले  बेटे  में  कभी  नहीं  बनेगी
अब  बोलिए , क्या  कहा  जाये  , ये  शास्त्री  है  या   मूढ़  लोग , जिन्हें  अपने  बारे  में  अपने  आने  वाले  पल  के  बारे  में  नहीं  पता  वो  लोग  किरण  राव और  आमिर  को  देख  के  अपने  दीर्घ  ज्ञान  से  ये  भविष्यवाणी  कर  रहे  है  !
आज  के  इस  दौर  में  किसको  ये  नहीं  पता  के  आज  बाप  से  दस कदम  आगे  उसका  बेटा  हमेशा  ही  आगे होता  है ! इसमे  नयी  बात  क्या  है  जो सार्वजनिक  तोर  पे  लिखी  और  बोली  जा रही है  !
हम  हमारे  एतिहास , साहित्य  और  कवियों  की  पोरानिक  रचनाओ को  पढ़े  तोह  पता  लगेगा  के  कही  क्कुह  बदला  है  और  कही  कुछ !
त्रेता  युग  में  राजा  दशरथ  की  तीन  रानियाँ  थी  लेकिन  उनके बड़े  बेटे  का  एक  सिद्धान्त  आज  शायद  किसी  के  जह्हन्न  में  भी  नहीं  
एक  पत्नी  एक  वचन  – सूर्यवंशी  ”
तब  क्या  ज्योतिष  शास्त्र  नहीं  थी  , उस  वक़्त  किसी  ने  ऐसा नहीं  बोला  होगा  न  तोह  राजा  दशरथ  के  पिता  को  और  नाही  राजा  दशरथ  को  के उनका  बेटा  वीर , योधा  और  ज्ञानी  होने  के  साथ  साथ  ऐसे  वचनों  का  पालन  भी करेगा  और  आपके  गुणों  को  देखते  हुए   आपसे किन्ही  दो  तीन  चीज़ों  में  कम  होगा !
क्योंकि उस  समय  में  सही  दिशा  सही  मार्ग  इस ज्ञान  ज्योति  से  दिए  जाते  थे  , नाकि ऐसे  विचार  पेश  करके !
ये  संस्कार  थे  और  ज्ञान  जो  गुरु  जनों   से  मिला , और  वो  “मर्यादा  पुर्र्शोत्तम   राम  ” कहेलाये .
उस  वक़्त  भी  ज्योतिष  शास्त्रा  था  , भगवान्  राम  और  सीता मईया  की  कुण्डलिया  भी  देखि  गयी  थी  36/36 गुण  भी  मिलाये  गए  थे , पर शास्त्र  इतना  बलवान  नही  था  के  उनके  14 साल  के  बनवास  को  होने  से  रोक पाया हो !
ऐसा  नहीं  था  के उस  वक़्त  इस  शास्त्र  के  ज्ञानी  नहीं  थे , या  किसी  को  इसकी  पहचान  नहीं  थी , में  जहा  तक  समझ  ता  हूँ  आज  के  इन  मूढ़ ज्ञानिओं  से  तो  उस  वक़्त  कई  कई  महान  ज्ञानी  बैठेंगे  होंगे , जिन्होंने भगवान्  राम  और  सीता  मईया  की  कुण्डलिया  भी  बनायीं  होंगी  !
लेकिन  वो  भी  उस  बनवास  को  नहीं  रोक  पाए  और  नाही  ये किसी  को  बता  पाए  के  उनके  विवाह  में  बहुत  बड़ी  समस्या  आने  वाली  है   ! पर  वो  समस्या  आई  और  बस  उस  समय  से एक  बात  लिखित  करदी  गयी , अंकित  कर दी  गयी …..
36/36 गुण  हो  भी तो विवाह  न  करे  
ये  किसी  ने  नहीं  सोचा  के  वो  विवाह  जिन  दो  लोगो  के  बीच हुआ  उनके  बीच  ऐसा  कोई  मत  भेद  नहीं  हुआ  के  जिस  की  वज़ह  से  यह  नियम  निकाल  दिया  गया  के  36/36 मिलने  पे  भी  शादी  करना  उचित  नहीं  !
उस  बनवास  में  किसी  का हित  छुपा  था  जिसका  विरोध  भी  हुआ और  जिसके  के  लिए  किया  गया  वोह  भरत  जैसा  भाई  आज  न  देख  ने  को  मिलता  है  न सुन्न  ने को  !


माता  कैकयी  की  महत्वकांक्षा  ने  उस  14 साल  के  बनवास  को आज  ऐसी  सचाई  बना  दिया  के  लोग  36/36 गुण  मिलने  पे  भी  आगे  नहीं  बढ़ पाते  क्योंकि  ऐसे  लोग  बढ़ने  नहीं  देते ! एतिहास  और  ज्योतिषी  को  मिला  के  कुछ का  कुछ  करवा  देते  है !
एक  समय  था  जब  इस  ज्ञान का उपयोग  इन्सान  के  जीवन  में चल  रही  उथल पथल  को  जान  ने  और  उसका  समाधान  खोज  के  देने  के  लिए  किया जाता  था  !
इस  ज्ञान  के  ऊपर  एक  और  शक्ति  है , जो  ये  दुनिया  चला रही  है  , भगवान्  राम  के  हाथों  रावन  का  वध  होना  श्रृष्टि  में लिखा  था  , सो  ये  रचना  खुद्द  ऊपर  वाले  ने  रची  ! वियोग  न  होता  तोह  रावन  दुष्कर्मो  मैं ना  आता  और  नाही  उसका  वध  होता  !

पर इन शास्त्रियों ने तर्क -वितर्क कर कर के , इस शास्त्रा का रूप और इसकी रेखा ही बदल डाली !
हंसी भी आती है तो दुःख भी ,के ये लोग ख्याति और संपदा पाने के लिए किस हद्द तक जा सकते है !
चलो एक घडी मान भी ले के भगवान् राम और सीता मईया के गुण जैसे हो वैसे नहीं होने चाहिए , वरना वियोग की स्तिथि बन्न सकती है !
लेकिन आज समाज में लोग शादियाँ करते है और करवाते है, समाज एक होना चाहिए , गोत्र अलग होने चाहिए , और कुंडलियों का मिलन होना चाहिए, कम से कम 18-30 तक के गुण मिलने चाहिए और भी बहुत सी “Terms and Conditions”.
में पूछता हूँ के जब आप पढ़े लिखे लोग यह सब कुछ करते हो देखते हो, इन ज्ञानिओं की बातों को सच मानते हो तो फिर इन सवालों का उत्तर भी इन्ही लोगो से दिलवादो :

a ) कुण्डलियाँ देखने के बाद भी 100% में से आज के ज़माने में 45% लडकियां और लड़के अपना परिवार क्यूँ नहीं संभाल पाते ?

b ) क्यों 50% लडकियां सब कुछ अच्छा होने के बाद भी दुखों और कई तरह के अत्याचारों से झूझती रहेती है ?

c ) सब कुछ दीखाने और करवाने के बाद भी लोगों को जीवन के हर स्तर पर जिंदगी के हालतों से झूझना क्यों पड़ता है ?

d ) क्यों आप लोग किसी फूटपाथ पे रह रहे गरीब की किस्मत बता के उसको उसकी अच्छी ज़िन्दगी का समाधान नहीं देते ?

e ) आप लोगो को उचे स्तर के लोगों से ही इतना प्यार क्यूँ होता है के बस उनके अच्छे कर्मो की घोषणा करते हो , गलत कर्मो की क्यूँ नहीं ?

f ) अगर आप ज्ञानी है तो सबके सामने अपने आने वाले पल की घोषणा करे के , अपने सही होने का प्रमाण क्यों नहीं देते ?

इस शास्त्रा को गलत कहेना सही नहीं होगा लेकिन इसका उपयोग जो लोग कर रहे है उनको इस चीज़ को समझना चाहिए के ये समाधान देता है भाविश्यवानी नहीं करता ! भविष्यवाणी करने का हक सिर्फ उस  ऊपर वाले को है किसी इन्सान को नहीं, अगर किसी इन्सान को भी है तो वो करोड़ों में एक होता है जिसे ऊपर वाले ने अपनी रहेमत से नवाज़ा होता है ! मुझे और आपको, आप सबको ये मालूम है के किस्मत में अगर "Collector" बन ना लिखा है तो में तभी बनुगा जब में उसके लिए प्रयत्नशील रहूँ ! आपको सबको ये भी मालूम होगा के हमारे यहाँ लड़का या लड़की के मांगलिक होने पे विवाह संभव नहीं माना जाता !लेकिन यहाँ में एक ऐसी हस्ती की ज़िन्दगी पे प्रकाश डालना चाहूँगा ! उनका नाम है  “ऐश्वर्या रॉय बच्चन "! ये खुद्द मांगलिक है और इनके मंगल होने के संकेत सार्वजनिक रूप से इन्ही लोगो ने घोषित भी किये थे, उसके विपरीत घटनाओं के होने के संकेत भी दे डाले थे , लेकिन अमिताभ जी  जो आज अपने समाज में और इस देश में एक उच्च स्थान पर विराजमान है , कई दिलो से उनके लिए दुआ निकलती है , उन्होंने सारी बातों को नज़रंदाज़ करते हुए इस विध्या का सही उपयोग किया और सही तरीके से इसका उपयोग करते हुए, अपने बेटे अभिषेक की शादी ऐश्वर्या से करवाई और इस मूढ़ समाज के सामने , इन पढ़े लिखे अनपढ़ लोगो के सामने के उदहारण दिया के सही ज्ञान होने से ,सही मार्गदर्शक साथ में होने से, ऊपर वाले का साथ और उस पे भरोसा होने से इन्सान के लिए कोई भी काम और कोई भी चीज़ उतनी भयावय नहीं ! आज सब कुछ सही चल रहा है सब कुछ ठीक है परिवार खेल रहा है हंस रहा है बढ़ रहा है ,हमको ख़ुशी है और लाखों और करोड़ों दिल यही दुआ मांगते है के यह परिवार और इस परिवार का मुखिया हमेशा खुश रहे !

ऐसा ही दूसरा उदहारण है “दस का दम 2”, जब मंच पे सलमान के साथ कंगना रानौत और एक ज्योतिष महोदय आये थे , उन्होंने कंगना को देख के सभ कुछ अच्छा बोल डाला , के आने वाला समय ख्याति, यश, संपदा अर्जित करने का होगा, विवाह का योग है etc. लेकिन खुद का यह नहीं देख पाए के 10 crore लेके जा सकता हूँ के नहीं  और  सबके सामने बोले भी थे जब सलमान ने पूछा था,
धन लक्ष्मी का योग बना हुआ है 
पर हुआ क्या , साइड वाले सोफे पे जाके चुप्प चाप से बेठ गए! अब क्या बोले ऐसे लोगों के बारे में ! लेकिन आज भी कई लोगो को इस तरह की मूढ़ता से गुजरना पड़ता है ! कही जगह गलत ज्ञान लेने से घर परिवार भिखर जाते है और कही इसी की बदोलत कई लोग जो आपस में अच्छे से जी सकते है वोह सदियों के लिए एक दुसरे से दूर हो जाते है !
ज्योतिष शास्त्र एक बड़ा , महान और सच्चा शास्त्र है, ये किसी का भविष्य निर्र्धारण नहीं कर सकता, ये मुश्किलों के समाधान बता सकता है, तकलीफों के उपचार दे सकता है !
इसके सही मार्गदर्शक बहुत कम आपको मिलेंगे लेकिन ज़िन्दगी मेहनत, लगन , और अच्छे विचारों से जी जाती है, कर्म अच्छे हो तो सब अच्छा होता है! ऊपर वाले से बड़ा खिलाडी इस दुनिया में न तो कोई शास्त्रा है और नहीं कोई इन्सान!

Wednesday, 7 December 2011

Sawaal ban ke khada hai yeh "KYUN"....




 नूर तेरी आँखों का ,
खवाबों में आता है क्यूँ !

                                     स्पर्श तेरी गहरी नज़रों का,
                                     मुझे सताता है क्यूँ !

तुझसे तुझे ही सुनो तो, लगता है ,
कोई तेरे पास आना चाहता है क्यूँ !

                                      आँखें है मेरी पर ख्वाब है तेरे ,
                                      मेरे ख्वाब कोई चुराना चाहता है क्यूँ !

जब मेरी तकदीर है तू ,
मुझसे कोई तुझे छिनना चाहता है क्यूँ !

                                      सवाल है जिन्दाज़ी मेरी ,
                                      उसका जवाब बनी सिर्फ तू !
                                      फिर दिल जवाब पाना चाहता है क्यूँ !

पैमाने पीने छोड़ दिए मैंने पर,
आसुओं का तेरा पैमाना ,दिल पीना चाहता है क्यूँ !

                                     तेरे होंठों पर मुस्कुराहट लाना चाहता है ,
                                     मेरी बातों से उदासी छा जाती है क्यूँ !

हर सवाल का जवाब है मेरे पास ,
लेकिन , सवाल बन के दिल में  बसा है तुझसे जुड़ा हर क्यूँ !


Zindagi Aur Rishton Ke Mayne....

आज की ज़िन्दगी  फास्ट है दौड़ती हुए, थम ने का मतलब है के आप इस  दुनिया में सबसे पीछे रहेने वाले इन्सान होंगे !

सबकी सोच आज आगे बढ़ने की है, चाहे सही हो या गलत, लेकिन अगर इस  ज़िन्दगी को कामयाबी तक ले जाना है तो रास्ते से जयादा उसपे चलने की सोच  होनी जरुरी है ! सोच होगी तो रास्ता सही है या गलत इससे ज़िन्दगी और कामयाबी दोनों को कोई मतलब नहीं !

लोगों को जब देखता हूँ अपने आस पास तो देख के लगता है के "ये लोग कामयाब होने के लिए, खुद्द से संतुष्ट होने के लिए, अपनी ज़िन्दगी को आराम दायक बना ने के लिए किसी भी हद्द तक जा सकते है " !

हर जगह कुछ न कुछ , कोई न कोई गलत कर रहा है पर उसका उसके इमान पे कोई फर्क नहीं ! मालूम होते हुए भी लोग दूसरों को अपनी कामयाबी की सीढ़ी बनाते है , कईओं को दर्द देके, दुःख देके अपना सपना पूरा करने की बस जुगत में लगे रहते है !

कुछ लोगों का कहेना होता है के फिल्म सिर्फ मनोरंजम का साधन है बस और कुछ नहीं, इन से कुछ सीखा नहीं जा सकता ! लेकिन शायद वो कहेते वक़्त यह भूल जाते है के फिल्म किसी न किसी के जीवन को दर्शाती जरुर है ! इन्सान किसी की ज़िन्दगी देख बोर ना हो यह सोच के उसमे मनोरंजन के तत्व डाले जाते है ! ऐसा ही कुछ आज के समाज को फिल्मों के कुछ समझाने की कोशिश की है  के जिसको कामयाब होना है आज की दुनिया में एक भाई अपने भाई का बुरा सोच लेता है , दोस्ती के नाम पर दगा और फरेब कदम कदम पर इन रिश्तों को खोखला साबित करते जा रहे है , प्यार का नाम आज एक महत्वकांक्षा है , जिसने  धोका, फरेब , झूठ सबकी हद्दे तोड़ डाली है !

कुछ दीनो पहेले रुपहेले पर्दे पैर एक हिंदी फिल्म आई थी , "प्यार का पंचनामा " ! कौन कैसे किसका कहा उपयोग कर रहा है , अपनी जरूरतें पूरी कर रहा है २:३० घंटे में देखने को मिला ! कौन कैसे अपनी जरुरत के लिए कहा एक को इस्तमाल करती है , कोई अपनी जिंदगी में जोह बोरियत है उसको दूर करने के लिए ताके बेचैन दिल को कुछ रहत मिले उसके लिए , कोई अपने ऑफिस में , जिंदगी में रोज़मर्रा के काम और आगे निकलने के लिए !यहाँ प्यार के अनोखे तरीके देखने को मिले और जो बात हमे ऊपर कही वोह कही ना कही सही साबित होती है !

जब कभी ऐसी बात होती है लोग बोलते है के "अरे यार फिल्म है अस्स्लियत थोड़ी ना है " ! ऐसा मैंने तब सुना जब एक जोड़ा , यह फिल्म देख के निकला और लड़की / लड़के ने बड़ी सी हंसी चेहरे पे लेते हुए अपने साथी लड़की/लड़के  से पुछा और फिर बड़े प्यार से उसके दिल का भोज हल्का कर डाला "क्या यार तुम्हे तो मुझपे इतना भी ट्रस्ट नहीं , शौना ऐसा कभी ना सोचना "! और कुछ दीनो बाद पता चलता है के .......

"बड़ा सा विराम !"

"बागबान " में जो  माँ बाप अपना सब कुछ देके , बच्चो से अपने लिए कुछ उम्मीद करते है उन्हें कही या तो बेटों की दुत्कार मिलती है कही जिसको बड़े अरमानो से लाये थे उन् बहुओं की कडवी बातें सुन्न नि पड़ती है ! माँ बाप जब तक सफलता ना मिल जाए तब तक एक सीढ़ी होते है , फिर खाली सुनसान से रास्ते बन्न जाते है , जिन्ह पे चलना आज की ऊची सोच रखने वालो को पसंद नहीं !

"लव दोस्ती etc." कैसे एक दोस्त दुसरें को धोका देता है कैसे एक प्यार फरेब की सीमा पार कर देता है !

यह कुछ फिल्मे प्यार को साथ लेके जो भी रहा हो हर उस धोके को दीखाती है जिनमे ज़िन्दगी को कामयाब बनाने के लिए, ज़िन्दगी को  कुछ आरामदायक बनाने के लिए  , एक संतुष्टि पूरी करने के लिए किये गए हर तरीके को समझाया है !

हम अपने आस पास नज़र घुमा के द्खेंगे तो हमे एक नहीं ना जाने कितने दीख जायेंगे! हमारी सोसाइटी में, हमारे ऑफिस में , हमारे क्लास रूम में , हमारे साथ जो हेमशा रहेते है उन् में !

हर जगह आज यही है इसके अलावा और कुछ देखेगा भी नहीं !

सच्चे साथ आज चाहे दोस्ती हो , प्यार हो , या परिवार कोई भी मात्र सिर्फ कहेने को मिलेंगे , कुछ ३०-३५ % बाकी तो आज सिर्फ

"लाशों पे पैर रख के , आगे बढ़ने का जमाना , सोच है ,
कामयाबी हासिल करने के लिए, किसी भी हद्द तक जा सकते है लोग  "

रिश्तों का कोई नाम नहीं है , कोई वजूद नहीं है , कोई गवाह नहीं है , ज़िन्दगी की कोई एहेमियत नहीं है , न ही ज़िन्दगी जिन एहसासों से जी जाती है वो अब आज सिर्फ मज़ाक और मनोरंजन के साधन है  !

जिंदगी और इसमे रिश्तों के आज कोई मायने नहीं ........ सब खाली है एक दौड़ है बस !


Tuesday, 6 December 2011

Pyaar Ki Dooriyaan.....

रात की गहेरयेओं में भी सफ़र चलता है ,
दिन के उजाले भी किसी को होसला देते है
लेकिन थम जाते है वो लोग जो,
तन्हाई को दिल से लगा लेते है !

                                                         होसलों का बुलंद होना जरुरी है
                                                         जिंदगी में थोडा दर्द होना जरुरी है
                                                         दम उन्ही इंसानों में होता है
                                                         जो दर्द को सीने से लगा लेते है !

प्यार का मतलब सब गलत लेते है
प्यार में दूरियों को कोई नहीं पहचानता
प्यार किस्मत में होता है जो,
दूरियों को दिल से लगा लेते है !

Kyun....

क्या हुआ , जो आँखों में नींद नहीं है ,
क्या हुआ , अगर आंसूं साथ में नहीं है !
क्या हुआ , अगर प्याले में शराब नहीं है !
                               क्यूँ ऐसा लगता है ,
                               आज मेरी सांसें मेरे साथ नहीं है !


क्या हुआ , अगर कोई सपनों में आती रही है ,
क्या हुआ , अगर कोई मुझे चाहती नहीं है !
क्या हुआ , अगर ग़मों की काली घटा छाती रही है !
                                क्यूँ ऐसा लगता है ,
                                आज मेरी किस्मत मेरे साथ नहीं है !


प्यार में अगर हम जीते नहीं,
तो हार ने का गम बनाये क्यूँ !


                                 चाहते तो है दिलों जान से उसे,
                                 बताना चाहे तो बताये क्यूँ !

वो भी किसी से इकरार करेगी ,
किस्मत में नहीं है तो सताए क्यूँ !

                                 चाह कर भी पाना चाहते है उसे ,
                                 भुलाना चाहे तो भुलाये क्यूँ !

किस्मत पे अपनी नाज़ है मुझे ,
बेवफा जिंदगी पे नाज़ जताए क्यूँ !

                                 आज नहीं तो कल आएगी,
                                 इन्सान इतने भी गलत नहीं, पर
                                 बुलाना चाहे तोह बुलाये क्यूँ !